छतरपुर में TET को लेकर शिक्षकों का विरोध तेज, कई संगठनों ने सौंपे ज्ञापन

 


मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। जिले में अलग-अलग शिक्षक संगठनों द्वारा प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर TET से जुड़े आदेशों पर आपत्ति जताई गई है।

अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा और अन्य संगठनों के बैनर तले शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई और प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की मांग की।

- शिक्षक संयुक्त मोर्चा का आवेदन: TET अनिवार्यता पर आपत्ति

शिक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा दिए गए आवेदन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि माध्यमिक शिक्षक (विषय शिक्षक) के लिए TET अनिवार्यता संबंधी आदेश को निरस्त किया जाए।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के लिए यह नियम अनुचित है और इससे उनके सेवा अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

साथ ही, शिक्षकों ने यह मांग भी रखी है कि उनकी नियुक्ति की वरिष्ठता प्रथम नियुक्ति दिनांक से ही मान्य की जाए, ताकि उनके अनुभव और सेवा का सम्मान बना रहे।

- AJJAKS संगठन की प्रतिक्रिया और अध्यक्ष का बयान



वहीं, अनुसूचित जाति आदिवासी अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJJAKS) की ओर से भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई गई है। संगठन के जिला अध्यक्ष लाल बहादुर अहिरवार ने इस मामले पर स्पष्ट रूप से कहा कि—

- वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर दोबारा TET लागू करना पूरी तरह अनुचित है।

उन्होंने प्रशासन से इस आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

🎤 ग्राउंड रिपोर्ट: शिक्षकों की जुबानी उनकी परेशानी



प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कई शिक्षकों से बातचीत के दौरान एक गंभीर समस्या सामने आई। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ करीब 50 से अधिक ऐप्स (कुछ के अनुसार 57 ऐप) पर काम करना पड़ता है।

शिक्षकों के मुताबिक—

लगातार डिजिटल रिपोर्टिंग और ऐप्स का दबाव बढ़ रहा है

इससे पढ़ाने का समय कम हो रहा है

शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है

यह मुद्दा अब शिक्षकों के बीच सबसे बड़ी चिंता बनता जा रहा है।

.बढ़ता असंतोष और आंदोलन की चेतावनी

लगातार सामने आ रही समस्याओं और मांगों को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। विभिन्न संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

.प्रशासन के सामने चुनौती

अब यह पूरा मामला प्रशासन के सामने है।

एक तरफ शिक्षक अपने अधिकार और काम के दबाव को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार के नियमों को लागू करने की प्रक्रिया भी जारी है।

👉ऐसे में देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे का क्या समाधान निकालता है।

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