छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासियों का आंदोलन 7वें दिन भी जारी। प्रशासन ने भूसौर गेट बंद कर घेराबंदी की, राशन और दवाओं पर रोक के आरोप।
छतरपुर: 7वें दिन भी जारी रहा आंदोलन, आदिवासी परिवार डटे
छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों का आंदोलन लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि मुआवजा वितरण में हुई कथित अनियमितताओं को दोबारा जांच कर ठीक किया जाए और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
हालांकि, प्रशासन इस मांग पर तत्काल सहमति जताने को तैयार नहीं दिख रहा है, जिससे स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है।
प्रशासन की सख्ती: भूसौर गेट बंद, भारी पुलिस बल तैनात
शनिवार को प्रशासन ने पन्ना टाइगर रिजर्व के भूसौर गेट को पूरी तरह बंद करवा दिया।
गेट पर वन विभाग और पुलिस के बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी तैनात कर दिए गए हैं।
किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं
आंदोलनकारियों के परिजनों को भी रोका जा रहा है
दवाइयों और जरूरी सामान की सप्लाई बाधित
इतना ही नहीं, मीडिया और राजनीतिक प्रतिनिधियों को भी अंदर जाने से रोक दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
राशन और दवाओं पर रोक के आरोप, बिगड़ रहे हालात
आंदोलनकारियों के परिजनों का आरोप है कि प्रशासन ने दबाव बनाने के लिए राशन और जरूरी दवाइयों की आपूर्ति रोक दी है।
इसका असर आंदोलन स्थल पर मौजूद:
- महिलाएं
- बुजुर्ग
- बच्चे
पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। कई लोगों की तबीयत खराब होने की खबरें भी सामने आई हैं।
ढोड़न बांध के विरोध में उग्र होता आंदोलन
केन-बेतवा परियोजना के तहत बन रहे ढोड़न बांध के विरोध में यह आंदोलन अब धीरे-धीरे उग्र रूप लेता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि:
यह आंदोलन केवल मुआवजा नहीं, बल्कि विस्थापन और अस्तित्व की लड़ाई है।
उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है।
डॉक्टर को रोके जाने का वीडियो आया सामने
एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बिजावर की डॉ. कंचन शुक्ला कहती नजर आ रही हैं कि वे आंदोलनकारियों का इलाज करने जाना चाहती थीं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।
पन्ना टाइगर रिजर्व गेट पर बढ़ा विवाद
भूसौर गेट को बंद किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है।
आवाजाही पर रोक से आक्रोश बढ़ा
क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात
ग्रामीणों में बल प्रयोग की आशंका
महिलाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के कारण स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
आंदोलनकारियों के आरोप vs प्रशासन का पक्ष
आंदोलनकारियों का आरोप:
कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने मेडिकल टीम भेजने का दावा किया, लेकिन डॉक्टर मौके तक नहीं पहुंचे
7 किलोमीटर पहले बैरिकेडिंग कर डॉक्टर, मीडिया और अन्य लोगों को रोक दिया गया
चेतावनी: यदि भूख या बीमारी से मौत होती है तो जिम्मेदार प्रशासन होगा
प्रशासन का दावा:
प्रशासन के अनुसार, मेडिकल टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब 95 लोगों का उपचार किया और जरूरी दवाइयां भी दीं।
साथ ही प्रशासन ने यह भी कहा कि कुछ लोग आंदोलन में शामिल होकर माहौल खराब करने और भड़काऊ गतिविधियों में शामिल हैं।
कलेक्टर का बयान
छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल के अनुसार:
पन्ना जिले के मझगांय और रूंझ गांव इस परियोजना से प्रभावित हैं
मुआवजा वितरण में शिकायतें मिली हैं
इन शिकायतों को स्थानीय प्रशासन को भेजा गया है
दोबारा सर्वे कर विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया चल रही है
मेडिकल टीम और विवाद की स्थिति
प्रशासन का कहना है कि मेडिकल टीम ने भूसौर गेट पर कैंप लगाकर उपचार किया।
बाद में जनप्रतिनिधियों और मीडिया के अनुरोध पर टीम डैम स्थल तक भी पहुंची, जहां:
95 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया
दवाइयां वितरित की गईं
हालांकि, लौटते समय टीम को कुछ लोगों ने घेर लिया, जिसे बाद में समझाइश देकर शांत कराया गया।
निष्कर्ष
केन-बेतवा लिंक परियोजना अब केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि हजारों आदिवासी परिवारों के अधिकार, जीवन और भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है।
जहां एक तरफ प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ सकता है, अगर दोनों पक्षों के बीच समाधान नहीं निकला।
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