तमिलनाडु - की राजनीति में इस बार एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है। सुपरस्टार से नेता बने Thalapathy Vijay की पार्टी तमिल वेत्री कड़गम (TVK) ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में दमदार प्रदर्शन किया है।
लेकिन इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह हैं आर. सबरीनाथन — एक ऐसा चेहरा, जिसकी जीत ने राजनीति में एक नया संदेश दे दिया है।
ड्राइवर का बेटा बना विधायक
विरुगमपक्कम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले आर. सबरीनाथन अब आधिकारिक रूप से जीत चुके हैं।
- इस सीट पर उनका मुकाबला डीएमके के उम्मीदवार प्रभाकर राज से था।
- सबरीनाथन ने यह चुनाव करीब 27086 वोटों के अंतर से जीत लिया है।
यह जीत सिर्फ एक राजनीतिक जीत नहीं है, बल्कि यह एक संघर्ष, विश्वास और बदलाव की कहानी है।
जब मंच पर भावुक हो गए थे पिता-पुत्र
जब TVK ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी और सबरीनाथन का नाम सामने आया, उस वक्त मंच पर एक भावुक पल देखने को मिला।
सबरीनाथन ने मंच पर ही विजय के पैर छुए और उन्हें गले लगाकर रो पड़े।
यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने इसे जमीन से जुड़े नेता की शुरुआत बताया।
इंजीनियर से नेता बनने का सफर
उम्र: लगभग 30 साल
पेशा: पहले इंजीनियर
विदेश अनुभव: कतर में नौकरी
सबरीनाथन ने एक सुरक्षित करियर छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना।
हालांकि उनके परिवार, खासकर उनके पिता चाहते थे कि वह नौकरी जारी रखें, लेकिन उन्होंने जोखिम उठाया और आज वही फैसला उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।
विजय से पुराना रिश्ता
सबरीनाथन का विजय से रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं है।
उन्होंने खुद बताया था कि वे विजय को तब से जानते हैं जब वे सिर्फ 1 साल के थे।
कई बार अपने पिता के साथ शूटिंग लोकेशन तक विजय को छोड़ने गए
खुद को फैन से भी ज्यादा मानते हैं
यानी यह रिश्ता सिर्फ नेता और कार्यकर्ता का नहीं, बल्कि परिवार जैसा जुड़ाव है।
क्यों खास है यह जीत?
विजय की पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में खास तौर पर तीन वर्गों पर फोकस किया:
युवा
महिलाएं
मछुआरे
इन्हीं वर्गों के लिए बड़े वादे किए गए, जैसे:
मछुआरों के लिए MSP और आर्थिक सहायता
छात्रों के लिए ₹25 लाख तक एजुकेशन लोन
महिलाओं के लिए ₹2500 मासिक सहायता और फ्री LPG
यही वजह रही कि पार्टी को जनता का व्यापक समर्थन मिला।
सबरीनाथन की जीत सिर्फ एक सीट जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि यह नई राजनीति की शुरुआत का संकेत है।
जहां एक तरफ बड़े-बड़े राजनीतिक परिवार चुनाव लड़ते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक ड्राइवर का बेटा विधायक बनकर यह साबित करता है कि
अगर मौका मिले, तो कोई भी इतिहास लिख सकता है।

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