केन-बेतवा लिंक परियोजना: 'चिता आंदोलन' तीसरे दिन भी जारी, विस्थापितों ने दमन और सुविधाएं रोकने के लगाए आरोप
छतरपुर और पन्ना जिलों में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों का 'चिता आंदोलन' रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी प्रशासन पर भ्रष्टाचार, मनमाने मुआवजा वितरण और दमनात्मक कार्रवाई के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों का दावा है कि कई प्रभावित परिवारों को उचित नोटिस और पूरा मुआवजा नहीं मिला। उनका आरोप है कि ग्राम सभा और आम सभा की अनदेखी कर मुआवजा तय किया गया, जिससे अनेक परिवार लाभ से वंचित रह गए।
प्रदर्शन में शामिल कुछ आदिवासी महिलाओं और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन पर दबाव बनाया गया, घूस की मांग की गई और पुलिस का भय दिखाकर पुश्तैनी जमीन छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि आंदोलन स्थल पर राशन, पेयजल, बिजली और दवाओं जैसी आवश्यक सुविधाओं की आपूर्ति बाधित की जा रही है, जिससे आंदोलनकारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि वास्तविक प्रभावितों को न्याय नहीं मिल रहा है और जल्द ही वे अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और प्रमाण सार्वजनिक करेंगे।
इस दौरान इश्मिता जैन, दमयंती पाड़ी (गांधी आश्रम), डॉ. कृष्णा गांधी, डॉ. दिनेश कुमार मिश्रा, श्रीमती मीना मिश्रा, पत्रकार जगदीश तिवारी तथा अजय नामदेव सहित कई समाजसेवियों ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया।
हालांकि, आंदोलनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर जिला प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में प्रशासन के पक्ष और जांच के निष्कर्ष का इंतजार है।

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