भैरा हाई स्कूल में दावों की खुली पोल: न रंगाई-पुताई, न पीने का पानी; शौचालय में उगी झाड़ियां

 

भैरा। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के भैरा गांव में स्कूल का हाल 

देखिये सरकारें भले ही शिक्षा के स्तर को सुधारने और सरकारी स्कूलों को हाईटेक बनाने के बड़े-बड़े दावे करती हों, लेकिन ग्राम भैरा का शासकीय हाई स्कूल इन दावों की पोल खोल रहा है। यहाँ का हाई स्कूल सिर्फ नाम मात्र के लिए संचालित हो रहा है। स्कूल की नई बिल्डिंग बनने के बाद से लेकर आज तक न तो इसकी पुताई (रंगाई-पोताई) कराई गई है और न ही बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया गया है। स्कूल में शासन द्वारा लाखों खर्च करने के बाद भी अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। जिससे ग्रामीणों और बच्चों में भारी आक्रोश है।

परिसर में ही टीचर पार्क करते हैं गाड़ियां, टकराकर 
चोटिल हो रहे मासूम




स्कूल प्रशासन की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। शिक्षक अपनी गाड़ियां (बाइक और कारें) व्यवस्थित जगह खड़ी करने के बजाय सीधे स्कूल परिसर (प्लेग्राउंड) के अंदर ही पार्क कर देते हैं। इस वजह से खेलते-कूदते समय कई बच्चे इन गाड़ियों से टकराकर गिर चुके हैं और उन्हें चोटें भी आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर खतरे की ओर ध्यान दिलाने के बाद भी शिक्षकों का रवैया पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।

शोपीस बनी पानी की टंकी, पाइप से पानी पीने को मजबूर




बच्चेस्कूल परिसर में पानी की टंकी तो रखवा दी गई है, लेकिन वह सिर्फ एक 'शोपीस' बनकर रह गई है। टंकी में कभी पानी नहीं भरा जाता। बच्चे प्यास बुझाने के लिए सीधे पाइप के सहारे पानी पीने को मजबूर हैं। पानी की इस अव्यवस्था के कारण कई बच्चे अपने घर से ही पानी की बोतल लाने को विवश हैं।

शौचालय में उगी घास और कचरा, कैसे जाएं छात्र?




स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर स्कूल में बेहतर शौचालय का दावा किया जाता है, लेकिन यहाँ की हकीकत बेहद शर्मनाक है। स्कूल के बाथरूम में बड़ी-बड़ी घास और कचरा जमा है। साफ-सफाई न होने के कारण यह पूरी तरह अनुपयोगी हो चुका है, जिससे छात्रों, विशेषकर छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कच्चा और बेस्वाद मिलता है मध्यान्ह भोजन




बच्चों का कहना है कि स्कूल में मिलने वाला मध्यान्ह भोजन बेहद घटिया स्तर का होता है। खाना अक्सर कच्चा और बेस्वाद रहता है, जिसे खाया नहीं जा सकता। यही वजह है कि अधिकांश बच्चे अब दोपहर का खाना (टिफिन) भी अपने घर से ही लेकर आते हैं।

पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति, सवाल पूछने पर भड़के शिक्षक
ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जब इस बदहाली और अव्यवस्था को लेकर स्कूल के शिक्षकों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कुछ भी बताने से साफ मना कर दिया और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया।


कलेक्टर से गुहार राम भरोसे चल रही व्यवस्था सुधारें
स्कूल की इस जर्जर और राम भरोसे चल रही व्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने अब जिले के कलेक्टर से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल का औचक निरीक्षण कर लापरवाह स्टाफ पर सख्त कार्रवाई की जाए और बच्चों के लिए पढ़ाई, साफ पानी, चालू शौचालय तथा अच्छे भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

Post a Comment

Previous Post Next Post