Panna
पन्ना में शुक्रवार को केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत विभिन्न बांध परियोजनाओं से प्रभावित किसानों और आदिवासियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की गिरफ्तारी के विरोध में हजारों ग्रामीण, किसान और आदिवासी महिलाएं सुबह से ही पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
भीषण गर्मी के बावजूद प्रदर्शनकारी पूरे दिन एसपी कार्यालय के बाहर डटे रहे। आंदोलनकारियों को उम्मीद थी कि पुलिस अधीक्षक स्वयं बाहर आकर ज्ञापन लेंगे और अमित भटनागर की रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट करेंगे, लेकिन देर शाम तक कोई अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा। इससे प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंझ, मझगांव, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासियों और किसानों की समस्याएं सुनने के बजाय प्रशासन दमनात्मक कार्रवाई कर रहा है। ग्रामीणों ने अमित भटनागर की गिरफ्तारी को अलोकतांत्रिक बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं Divya Ahirwar ने कहा कि प्रशासन के दबाव में आंदोलन खत्म नहीं होगा, बल्कि और मजबूत और उग्र होगा। प्रदर्शनकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों को लेकर उच्च स्तरीय समिति की बैठक बुलाने की मांग भी उठाई।
धरने में पार्षद दिव्या अहिरवार, पवन सिंह पटेल, बहादुर आदिवासी, गयाप्रसाद पटेल और अनमोल कोंदर समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और आदिवासी महिलाएं शामिल रहीं। वहीं आंदोलन के समर्थन में Vikrant Bhuria, Abhishek Parmar, केशु राजा भुवन विक्रम सिंह, लोकेंद्र वर्मा, अनीस खान, राजपाल सिंह, राज मिश्रा, स्वतंत्र अवस्थी और सदफ खान सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
देर शाम तक अमित भटनागर की रिहाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।


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