18 दिन बाद अमित भटनागर ने आमरण अनशन किया स्थगित, बोले- संघर्ष जारी रहेगा, अब होगा 'न्याय सत्याग्रह'

 

छतरपुर, 23 जुलाई 2026। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित लोगों के अधिकारों को लेकर पिछले 18 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे जय किसान संगठन के नेता एवं केन-बेतवा लिंक परियोजना चिता आंदोलन के संयोजक अमित भटनागर ने गुरुवार को अपना आमरण अनशन स्थगित कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि अब इसे 'न्याय सत्याग्रह' के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।

अनशन स्थगित करने के बाद अमित भटनागर ने कहा कि उनका 18 दिन का आमरण अनशन अपने उद्देश्य की पहली सफलता हासिल करने के बाद स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने सकारात्मक पहल करते हुए छतरपुर जिले के केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े उन सभी छूटे हुए पात्र लोगों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी किया है, जिनका अब तक सर्वे में नाम शामिल नहीं हो पाया था। इसके लिए गांव-गांव सर्वे दल भेजे जा रहे हैं और इस प्रक्रिया में जय किसान संगठन के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी रहेगी।





उन्होंने कहा कि यह केवल संघर्ष की शुरुआत है। अब वे 'न्याय सत्याग्रह' के माध्यम से गांव-गांव जाकर प्रभावित लोगों के साथ खड़े होंगे, प्रशासन के सकारात्मक कदमों में सहयोग करेंगे और हर वादे की निगरानी भी करेंगे। यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन के अगले चरण भी शुरू किए जाएंगे।

अमित भटनागर ने बताया कि आंदोलन को देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों का समर्थन मिला। उन्होंने मेधा पाटकर, प्रशांत भूषण, सौम्या दत्ता, नीलम आहलूवालिया, कैलाश मीणा, अभिनेत्री पूजा भट्ट सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान नेताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा आंदोलन समाप्त करने की अपील का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छतरपुर और पन्ना जिले की कई आदिवासी माताओं ने चूल्हा बंद कर स्वयं भी भोजन नहीं किया। इस भावनात्मक और नैतिक समर्थन का उनके निर्णय पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसी कारण उन्होंने फिलहाल अपना आमरण अनशन स्थगित करने का निर्णय लिया।

अमित भटनागर ने कहा कि उनका स्वास्थ्य लगातार खराब होने के कारण वे फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में अस्पताल में भर्ती हैं। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वे सीधे प्रभावित गांवों में जाकर लोगों के बीच काम शुरू करेंगे।

उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष केवल विस्थापितों के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी समुदाय के न्यायपूर्ण अधिकारों और विस्थापन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन को भरोसा दिलाया कि जहां सकारात्मक पहल होगी वहां पूरा सहयोग दिया जाएगा, लेकिन जहां भी अन्याय दिखाई देगा, वहां आंदोलन, विरोध और संघर्ष जारी रहेगा।




Post a Comment

Previous Post Next Post