मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों का अनोखा आंदोलन सामने आया। सूरज अहिरवार के नेतृत्व में महाराजपुर तहसील क्षेत्र के टटम गांव के बच्चे और ग्रामीण सड़क, पुल और बिजली की समस्या को लेकर करीब 40 किलोमीटर पैदल चलकर छतरपुर की ओर रवाना हुए।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या बनी हुई है। वहीं बारिश के मौसम में स्कूल जाने वाले बच्चों की परेशानी और बढ़ जाती है। रास्ते में पड़ने वाले नाले में पानी भर जाने के कारण बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बारिश के बीच पैदल निकले बच्चे और ग्रामीण
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब देशभर में लोग राष्ट्रीय पर्व मना रहे थे, उसी दौरान टटम गांव के ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के मौके पर नहीं पहुंचने के बाद ग्रामीणों और बच्चों ने छतरपुर जाकर अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखने का फैसला किया।
इसके बाद बच्चे, महिलाएं और ग्रामीण करीब 40 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल पड़े। बारिश के बावजूद आंदोलनकारी पीछे नहीं हटे। करीब 15 किलोमीटर की यात्रा के बाद महाराजपुर में पड़ाव किया गया, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर उन्हें समझाने का प्रयास किया।
स्कूल जाने में बच्चों को होती है परेशानी
प्रदर्शन में शामिल बच्चों का कहना है कि स्कूल जाने के रास्ते में एक बड़ा नाला पड़ता है। बारिश के दिनों में नाले में पानी भर जाने के कारण उन्हें पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक यह रास्ता बच्चों के लिए बेहद जोखिम भरा है। उनका आरोप है कि बारिश के मौसम में नाला पार करना मजबूरी बन जाता है और इससे पहले भी हादसे हो चुके हैं।
रात 1:30 बजे विधायक से हुई बातचीत
देर रात करीब 1:30 बजे सूरज अहिरवार सहित आंदोलनकारियों की महाराजपुर विधायक कामाख्या प्रताप सिंह 'टीका राजा' से बातचीत हुई।
बातचीत के दौरान सड़क, पुल और बिजली की समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने अपनी बात रखी। इसके बाद उन्हें जल्द काम शुरू कराने का आश्वासन दिया गया।
आंदोलनकारियों के अनुसार सड़क और पुल से जुड़े कार्यों के लिए 3-4 दिन के भीतर टेंडर प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिया गया है। आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन समाप्त किया गया।
अब ग्रामीणों को काम शुरू होने का इंतजार
करीब 40 किलोमीटर पैदल यात्रा और कई घंटे चले आंदोलन के बाद ग्रामीणों को अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन से उम्मीद बंधी है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्याओं का वास्तविक समाधान तभी माना जाएगा, जब सड़क, पुल और बिजली का काम जमीन पर शुरू होगा।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर अब अगले कुछ दिनों में होने वाली कार्रवाई पर है। यदि तय समय में काम शुरू होता है तो यह आंदोलन ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है।



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